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आर्य समाज के मुख्य १० नियम,

  • सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सब का आदि मूल परमेश्वर है।
  • ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वांतर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है।
  • वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना, सब आर्यों का परम धर्म है।
  • सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिए।
  • सब काम धर्मानुसार, अर्थात् सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहिएँ।
  • संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है। अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।
  • सबसे प्रीति-पूर्वक, धर्मानुसार, यथायोग्य वर्तना चाहिए।
  • अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिये।
  • प्रत्येक को अपनी ही उन्नति में संतुष्ट न रहना चाहिये, किंतु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए।
  • सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वाहितकारी नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिये और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतंत्र रहें।
  • आर्य समाज मंदिर

    *आर्य समाज गोरखपुर ( बक्शीपुर ) का संक्षिप्त इतिहास। *आर्य समाज गोरखपुर ,बक्शीपुर की स्थापना सन 1897 में हुई थी। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रथम आर्य समाज थी । इसका अत्यंत गौरवमय अतीत रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस आर्य समाज के लोगों का अप्रतिम योगदान रहा। इस आर्य समाज के तत्कालीन प्रधान महाशय जोखन राम आर्य पंo राम प्रसाद बिस्मिल से मिलने के लिए गोरखपुर जेल में जाया करते थे और जब उन्हें फांसी हुई तो तत्कालीन कलेक्टर से अनुमति ले कर अपनी खद्दर की धोती से कफन ओढ़ाया तथा पुलिस के साथ जा कर वैदिक विधि से उनका अंत्येष्टि संस्कार किया । सन 1930 में इस आर्य समाज के सदस्य कृष्ण अवतार लाल मुख्तार ,शिव अवतार लाल मुख्तार तथा जोखन राम आर्य आदि ने डीo एo वीo इंटर कॉलेज की स्थापना किया जिसकी बाद में अनेक शाखाएं जैसे डीo एo वीo पीo जीo कॉलेज,गर्ल्स इंटर कॉलेज, गर्ल्स डिग्री कॉलेज , दयानंद शिशु सदन, डीo एo वीo इंटर कॉलेज खोराबार आदि स्थापित हुईं । सन 1945 में इस आर्य समाज के प्रधान गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार के स्नातक डॉo सूर्य देव प्राणाचार्य ने चौधरी राम हर्ष चंद रईस, व्यापारी प्रसाद गुप्त आदि नगर के लब्ध प्रतिष्ठ लोगों को इस समाज से जोड़ कर आर्य कन्या पाठशाला की स्थापना किया जो कालांतर में एमo पीo पीo आर्य कन्या इंटर कॉलेज के रूप में जानी जाने लगी। इसी आर्य समाज के द्वारा गुरुकुल गोरखनाथ की भी स्थापना की गई थी।

    विवाह प्रक्रिया

    गोरखपुर के मंदिर में आर्य समाज विवाह के लिए पंजीकरण करने की प्रक्रिया

    योग्यता आर्य समाज विवाह

    आर्य समाज मंदिर गोरखपुर में विवाह की पात्रता के बारे में विस्तृत जानकारी जानें

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